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Mallikaarjun Ka Tharur Pe Kara Rukh

🗣️ “पार्टी लाइन से भटकना अब बर्दाश्त नहीं” — कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का शशि थरूर पर सख्त रुख

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नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी के अंदर विचारों का मतभेद अब सतह पर आने लगा है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शशि थरूर के बयानों पर सख़्त प्रतिक्रिया देते हुए साफ़ किया है कि जो नेता बार-बार पार्टी की सोच और दिशा से हटकर बात करते हैं, उन्हें चेतावनी दी जाएगी। उनका इशारा सीधा शशि थरूर की ओर था, जिन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक शैली और वैश्विक छवि की खुलेआम तारीफ की थी।

🧠 क्या कहा था थरूर ने?

कुछ दिन पहले शशि थरूर ने एक सार्वजनिक मंच और लेख में कहा कि नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंचों पर भारत की "प्रभावी पहचान" बनाई है और उनकी नेतृत्व शैली में "आत्मविश्वास और स्पष्टता" है।
थरूर ने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा से उनका कोई मेल नहीं, लेकिन एक नेता के रूप में मोदी की कई खूबियाँ हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

🔥 खड़गे की तीखी प्रतिक्रिया:

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने थरूर के बयानों को नकारते हुए कहा:

"हमारे लिए देश पहले है, संगठन पहले है, लेकिन कुछ लोग शायद अपने निजी ब्रांड को पार्टी से ऊपर रखने की कोशिश कर रहे हैं।"

उन्होंने यह भी कहा कि:

"जो नेता बार-बार पार्टी की नीतियों के उलट बयानों से भ्रम फैलाते हैं, वे संगठन की एकजुटता को नुकसान पहुंचाते हैं।"

इस बयान के जरिए खड़गे ने बिना नाम लिए साफ़ कर दिया कि पार्टी में अब 'फ्रीलांस राजनीति' के लिए जगह नहीं है।

🧩 पार्टी के भीतर खींचतान

  • शशि थरूर कांग्रेस के उन गिने-चुने नेताओं में शामिल हैं जो खुलकर अलग राय रखने के लिए जाने जाते हैं।

  • 2022 के कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव में उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे को चुनौती दी थी, हालांकि वह चुनाव हार गए थे।

  • थरूर का मानना है कि पार्टी को अब "आत्मनिरीक्षण" और "नई सोच" की ज़रूरत है, जबकि नेतृत्व उन्हें 'डिसिप्लिन से बाहर' मानता है।

📍 केरल कांग्रेस की चिंता

थरूर के गृह राज्य केरल में कांग्रेस नेतृत्व उनके बयानों से असहज महसूस कर रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि मोदी की तारीफ करने वाले बयान लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की छवि को कमज़ोर कर सकते हैं।

यह भी संभावना जताई जा रही है कि कांग्रेस नेतृत्व अब थरूर को भविष्य में मिलने वाले बड़े पदों या ज़िम्मेदारियों से दूरी बना सकता है, ताकि पार्टी लाइन की एकता बनी रहे।

🧭 थरूर का जवाब

हालांकि शशि थरूर ने अब तक कोई सीधा जवाब नहीं दिया है, लेकिन उनके हालिया इंटरव्यू में उन्होंने इशारों-इशारों में कहा था:

“मैं पार्टी का अनुशासित सिपाही हूँ, लेकिन मेरा दिमाग़ और ज़ुबान मेरी अपनी है। मैं उड़ने से पहले किसी से इजाज़त नहीं माँगता।”

उनके इस बयान से यह साफ़ है कि थरूर विचारों की स्वतंत्रता को सर्वोपरि मानते हैं — भले ही वह पार्टी लाइन से अलग क्यों न हो।

🧨 निष्कर्ष: विचारों की लड़ाई या अनुशासन का संकट?

कांग्रेस में यह तकरार सिर्फ थरूर और खड़गे के बीच नहीं, बल्कि नई सोच और पारंपरिक अनुशासन के बीच टकराव का संकेत देती है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस पार्टी इस मतभेद को आंतरिक लोकतंत्र की तरह लेती है या इसे विचारधारा से गद्दारी मानती है।

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