दीघा में पहली बार रथ यात्रा का आयोजन, होटल वाले किराए में बेतहाशा बढ़ोतरी कर रहे हैं – प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी
पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय समुद्री पर्यटन स्थल दीघा में इस बार एक नई परंपरा की शुरुआत होने जा रही है। यहां पहली बार भव्य रथ यात्रा का आयोजन किया जा रहा है, जिससे न सिर्फ श्रद्धालुओं में उत्साह है, बल्कि इस आयोजन ने मंदिर पर्यटन को भी एक नया बढ़ावा दिया है।
जैसे ही रथ यात्रा की तारीख नजदीक आई, वैसे ही दीघा आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इज़ाफा हुआ है। लेकिन इस बढ़ती मांग का फायदा उठाते हुए कई होटलों ने कमरों का किराया बेहिसाब बढ़ा दिया है, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी हो रही है।
होटल किराए में 2 से 3 गुना तक बढ़ोतरी
मिल रही शिकायतों के अनुसार, कुछ होटल उन कमरों के लिए भी ₹4000 से ₹6000 तक वसूल रहे हैं, जो आम दिनों में ₹1500 से ₹2000 के बीच मिल जाते थे। स्थानीय लोग और पर्यटक इस अचानक बढ़े हुए किराए को लेकर नाराज़ हैं और इसे सीधा-सीधा "लूट" बता रहे हैं।
प्रशासन ने लिया संज्ञान, होटल वालों को चेतावनी
जैसे ही यह मामला सामने आया, दीघा शहरी विकास प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि अगर होटल मालिक इस तरह बिना किसी तर्क के किराया बढ़ाते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कुछ होटलों को तो पहले ही चेतावनी नोटिस थमा दिया गया है।
पर्यटन विभाग ने होटल संचालकों को याद दिलाया है कि राज्य सरकार ने दीघा को धार्मिक पर्यटन के एक नए केंद्र के रूप में विकसित करने का फैसला लिया है, और अगर पर्यटकों का अनुभव खराब हुआ, तो इसका नुकसान पूरे क्षेत्र को उठाना पड़ेगा।
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश
पहली बार हो रही इस रथ यात्रा को सरकार और स्थानीय प्रशासन बड़े स्तर पर सफल बनाने की तैयारी में जुटा है। आयोजकों का मानना है कि इससे दीघा को केवल समुद्री सैरगाह ही नहीं, बल्कि एक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में भी पहचाना जाएगा। मंदिरों के आस-पास के क्षेत्र को सुंदर तरीके से सजाया जा रहा है, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की जा रही है और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जा रहा है।
लेकिन होटल मालिकों की लालच बन सकती है बाधा
हालांकि अगर होटल संचालक इसी तरह मनमानी करते रहे, तो यह सारी कोशिशें बेकार जा सकती हैं। अधिक किराया देना हर किसी के लिए संभव नहीं होता, और ऐसे में कई श्रद्धालु अपनी यात्रा टाल सकते हैं या किसी दूसरे स्थान का रुख कर सकते हैं।
प्रशासन की ओर से अपील की गई है कि होटल वाले सेवा और आतिथ्य भावना को प्राथमिकता दें, न कि मौके का गलत फायदा उठाएं।
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